Wednesday, 16 March 2016

बस यूँ ही

बस यूँ ही 

ग़लिबन यूँ हुआ होगा, 
वो कुछ ख़फ़ा हुआ होगा,
फिर रूठ कर बेवजह,
चला गया होगा,
कुछ दूर जा ठिठका होगा,
अपने हर ज़हन से लड़ा होगा, 
फिर मुड़ा होगा, 
अब उसे गिला होगा, 
लेकिन, 
लौट किस सबब आए,
बस यही सोचता होगा ।।
-विनी
१५/१२/१५

Saturday, 12 March 2016

नज़्म

नज़्म 
वोह बहुत दूर से पूछता है हाल मेरा,
रात बहुत सर्द है, ये कैसे कहते हैं ?
यूँ तो किसी साये ने सताया नहीं दिन भर, 
लेकिन धूप में तपिश बहुत है, कैसे कहते हैं? 
गूँजतीं हुई तन्हाई की ख़ामोश सी आवाज़,
इस ज़बान में ख़ैरियत कैसे कहते हैं?
बँट गए हैं हम ज़र्रा ज़र्रा दामन दामन,
इस बात को आख़िर कैसे कहते हैं?
नाम ले कर उस का पुकारा मूसलसल,
जैसे वोह सुन ले वैसे,कैसे कहते हैं ?
हमने क्या ना कहा, उस ने क्या ना सुना,
जो उनकही रह गयी वोह बात कैसे कहते हैं?
सुबह का गया वोह लौटा नहीं शब भर
हमें इंतज़ार है बहुत, ये कैसे कहते हैं ?
लौट आए हम जो गए थे मस्जिद दुआ माँगने,
जो जानता हो सब कुछ उस से अपनी बात कैसे कहते हैं ?
-विनी
२०/१२/१५

Friday, 11 March 2016

speechless

She,
loved the treble in his voice, 
Lost herself in the caress of his whispered words, 
Longed to hear him speak, 
He , 
thought her eyes were gifts,
Wrapped in gold,
And each time she opened them,
He lost his voice and heard them speak,
And thus speechless, they remained, without,
Listening, to the echo of heartbeats within ...
-Vinny
15/1/16

Snowflakes

Snowflakes 
I came up to the edge of the sill, she said,
But tarried,
Fearing the jump,
Did you not see me waiting?he said,
If only you'd jumped,
The massed white would enfold you too,
As it does me,
I fear the drop and the fall,
The Unknown, 
The assimilation with the whole, 
Will I still be me? 
Thus enfolded? 
There's not much time, he whispered urgently, 
Come step away from the sill
Softly with the breeze 
For while you ponder  the jump,
From the edge of the sill,
It's time to melt, liquid 
In the blink of a heartbeat,
That moment will not wait.
Vinny 
10/3/16 

Thursday, 10 March 2016

शुकराना

शुकराना
तुम ने,
तोहफ़े में भेजे हैं,
कैलेंडर, डाइअरी,पेन,
हम नाशुकरे तो नहीं,
मगर,
हाशिए में ही सही,
कुछ वक़्त लिख दिया होता,
हमारे नाम,
हम, उस डाइअरी में,
उस पेन से,
उस तारीख़ के नाम
एक शुकराना लिखते ...
-विनी

६/१/१६

तुम






तुम 
पिछले बरस फूल थे 
रंग थे शबनम थी बहार थी 
संगमरमर पर उजली धूप बिखरी थी 
सातों रंगों में खिली खिली
तितलियाँ ख़ुश थी सभी
इसलिये के तुम थे
इस बरस
शाम उदास रहती है, रात उदास
रंग गुम गए हैं कहीं
तितलियों ने छोड़ दिया है देश
धूप की तपिश रूह को झुलाए जाती है
इस बरस, शाम उदास है, रात उदास
इसलिए के तुम नहीं हो ...
विनी
११/१/१६

दुहायी

दुहायी
वो चला तो गया,
लेकिन पीछे छोड़ गया,
एक टीस,
नहीं मीठी नहीं,
रिसते घाव की मनिंद,
दुहायी सी,
फूट पड़ेगी एक दिन,
खाल पर दिखायी देगी,
असर बहुत होता है,
दुहायी में ,
दुआ में।
-विनी
१२/१/१६